गौरतलब है कि 24 मार्च की मध्य रात्रि से लगे लॉकडाउन के चलते होटल पूरी तरह से बंद थे। प्रदेश में 28 जून से होटल खोले गए। लॉकडाउन के चौथे चरण में रेस्टोरेंट को पार्सल सुविधा शुरू करने के साथ खोलने की अनुमति दी गई। लेकिन कोरोना प्रभाव इतना है कि होटलों में काफी कम ग्राहक पहुंच रहे हैं। पार्सल भी उम्मीद से कम ही हो रहे हैं।
छत्तीसगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है कि अगर शासन द्वारा होटलों को राहत नहीं दी गई तो बहुत से होटल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। पिछले दिनों उनकी मांगों को लेकर एसोसिएशन ने शासन के पास प्रस्ताव भेजा था। छत्तीसगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के संरक्षक कमलजीत सिंह होरा ने बताया कि होटल इन दिनों कोरोना के प्रभाव के चलते बुरी स्थिति में हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए।
कारोबारियों ने ऑनलाइन से तोड़ा नाता
ऑनलाइन भोजन परोसने वाली कंपनियों द्वारा ज्यादा कमीशन लेने के कारण इन दिनों बहुत से होटल कारोबारियों ने डिलीवरी के लिए ऑनलाइन कंपनियों से नाता तोड़ लिया है। कारोबारियों की मांग है कि ऑनलाइन कंपनियां अपना कमीशन कम करें।
सर्वाधिक प्रभाव इन पर
होटल कारोबार गिरने का सब्जी, राशन सामग्री, अंडा-मुर्गी, दूध, पनीर सप्लायरों पर काफी प्रभाव पड़ा है। सप्लायरों का कारोबार बिल्कुल ठंडा पड़ गया है।
चाहते हैं होटल कारोबारी
1. होटल कारोबारियों का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में होटल पूरी तरह से बंद रहे और आय शुन्य रही। इसलिए लॉकडाउन की अवधि का बिजली बिल पूरी तरह से माफ हो।
2. एक साल की प्रॉपर्टी टैक्स में छूट मिले
3. बार फीस व मिनिमम गारंटी में छूट मिले
4. कर्मचारियों का वेतन देना अभी मुश्किल है, इसमें सरकार को मदद करनी चाहिए








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