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जागरूकता:मितानिन दीदी महिलाओं को क्विज से बता रहीं सेनेटरी पैड्स का महत्व

ये हैं महासमुंद जिले की मितानिन सुपरवाइजर आरती डडसेना। गांवों में लोग इन्हें ‘’मितानिन दीदी’’ के नाम से जानते हैं। लोगों ने ये नाम इनके पद से नहीं बल्कि इन्हें ये नाम इनके काम की वजह से दिया गया है। दरअसल, आरती डडसेना कोरोना काल में भी गांव-गांव जाकर किशोरियों-महिलाओं को सेनेटरी पैड्स का महत्व बता रहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी आरती रोज सुबह-सुबह एक बैग लेकर अपने काम के लिए निकल जाती हैं। विभिन्न स्थानों पर जाकर ग्रामीणों को कोरोना संक्रमण से बचाव की जानकारी देने के साथ-साथ महिलाओं को माहवारी में स्वच्छता रखने का तरीका बता रही हैं।

कपड़े की बजाए सैनेटरी पैड्स ज्यादा सुरक्षित है, इसकी जानकारी देकर इनका ही उपयोग करने की सलाह भी दे रही हैं। हालांकि माहवारी स्वच्छता के संबंध में समुदाय में जागरूकता लाने के लिए उन्हें काफी कुछ झेलना भी पड़ा। रूढ़ी विचारधारा के लोग इन्हें ताने मारते। इसके बावजूद ये अपनी काम में लगी रहीं। गांव की महिलाएं-किशोरियों भी माहवारी पर बात करना पसंद नहीं करती थीं।

किशोरियां भी स्वास्थ्य के प्रति भी रूचि नहीं लेती थीं लेकिन हिम्मत ना हारते हुए मितानिन आरती के अथक प्रयास से महासमुंद जिले के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं काफी हद तक माहवारी के दौरान कपड़े के बजाए सैनेटरी नैपकिन के प्रति जागरूक हुई हैं। किशोरियों को भी इसका उपयोग ही करने की सलाह भी दे रही हैं।

आरती बताती हैं ग्रामीण इलाकों में माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता में कमी है। लगभग डेढ़ साल से वह इस क्षेत्र में कार्य करते हुए किशोरी स्वास्थ्य और माहवारी स्वच्छता को लेकर समुदाय को जागरूक कर रही हैं। हर सप्ताह किसी ना किसी गांव में एक जागरूकता कार्यक्रम करती हैं। इसमें किशोरियों और उनकी माताओं को शामिल किया जाता है। इस दौरान क्विज या कुछ खेल कराकर किशोरियों को स्वच्छता के महत्व के बारे में बताती हैं।

मितानिन दीदी से ही जाना स्वच्छता का महत्व

हेमकुमारी और बासंती साव ने कहा कि माहवारी के दौरान स्वच्छता का क्या महत्व है, यह मितानिन दीदी से ही जाना। पहले हम मासिक धर्म के दौरान कपड़े का उपयोग ही करते थे। कपड़े का माहवारी के दौरान दोबारा उपयोग करना असुरक्षित है, इसकी जानकारी जब से मिली है तब से हम पैड्स ही उपयोग कर रहे हैं। बासंती ने बताया आर्थिक स्थिति हमारी ठीक नहीं होने से हम पैड्स नहीं खरीद सकते थे, मगर मितानिन आरती दीदी ने हमें कुछ महीने पैड्स खरीदकर दिए और उपयोग करने को कहा।

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