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छत्तीसगढ़ अब लॉकडाउन की तरफ:बाजारों में भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी, सरकार ने कहा- ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं होगा लॉकडाउन

तस्वीर भिलाई के सुपेला बाजार की है। किसी के पास मास्क नहीं था तो किसी दुकान के बाहर फिजिकल डिस्टेंसिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालात इस वजह से भी बेकाबू हैं कि लोगों को लगता है जिले में कभी भी लॉकडाउन ना लगा दिया जाए।
  • रायपुर के गोलबाजार और भिलाई सुपेला में सुबह से ही गहमा-गहमी, जरुरी चीजें खरीदने पहुंच रहे लोग
  • प्रशासन की अपील खाने-पीने, दवाएं जैसी जरूरी सेवाएं रहेंगी लॉकडाउन से बाहर, घबराने की जरूरत नहीं

प्रदेश में लॉकडाउन की सुगबुगाहट का असर अब बाजार पर पड़ रहा है। रायपुर, भिलाई, रायगढ़ जैसे शहरों में रविवार की सुबह से लोग देखे गए। भिलाई के सुपेला स्थित सब्जी बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की अनदेखी की गई। सभी को जरूरी चीजें खरीदकर जमा करने लेने की हड़बड़ी नजर आई। शनिवार को मुख्यमंत्री निवासी में हुई बैठक के बाद यह तय किया गया था कि लॉकडाउन करने का अधिकार कलेक्टर के पास होगा। जरूरत महसूस होने पर कलेक्टर लॉकडाउन लागू कर सकते हैं। यदि लॉकडाउन किया गया तो कम से कम 7 दिनों का होगा। 

अब सरकार की तरफ से यह भी साफ कहा गया है कि लॉकडाउन अगर होता है तो सिर्फ शहरी इलाकों में होगा। ग्रामीण इलाकों में लॉकडाउन नहीं होगा। सरकार की तरफ से बताया गया है कि आम लोगों को आवश्यक वस्तुओं को खरीदने का पर्याप्त समय मिल सके और वे अनावश्यक घबराहट में वस्तुओं का संग्रहण करने से बचें, यह देखना भी जिला प्रशासन का काम होगा। 

लॉकडाउन के हालात बनने पर स्वास्थ्य, पेयजल आपूर्ति, साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, फायर ब्रिगेड की व्यवस्था चलती रहेगी। शासकीय कार्यालय एक तिहाई कर्मियों के साथ कार्य करेंगे। कारखाने या निर्माण इकाईयों को शर्तों के साथ काम करने की अनुमति होगी। इन शर्तों में कामगारों को नियंत्रित वातावरण में रखना, कामगारों के परिवहन की व्यवस्था करना और कोविड-19 पाॅजीटिव होने की स्थिति में उनके उपचार और अस्पताल का खर्च उठाना शामिल है। पेट्रोल पंप, अस्पताल, क्लीनिक, पशु चिकित्सा सेवाएं, दवाई दुकान, दूध और इससे संबंधित उत्पाद, सब्जी दुकान पहले की तरह खुले रहेंगे।

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