Chhattisgarh News : बिलासपुर। राज्य निशक्तजन स्रोत संस्थान में 1000 करोड़ के घोटाले की जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ने हाई कोर्ट में एक अन्य याचिका दायर कर महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा पर आरोप लगाया है कि 1000 करोड़ से अधिक रुपये की गड़बड़ी करने वाले अफसरों को बचाने की कोशिश की गई।
वर्ष 2014 में राज्य निशक्तजन स्रोत संस्थान के नाम पर एनजीओ का गठन हुआ। आरोप है कि तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी विवेक ढांड समेत आधा दर्जन आइएएस अफसर दिव्यांगों को लाभ पहुंचाने के नाम पर पर्दे के पीछे एनजीओ का संचालन कर रहे। प्रदेशभर में समाज कल्याण विभाग का एक सामानांतर दफ्तर चलाया जा रहा था।
सरकारी कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति की गई। साथ ही कागजों में लाखों रुपये हर माह वेतन भुगतान हो रहा था। संविदा कर्मचारी कुंदन सिंह ने नियमितीकरण के लिए जब समाज कल्याण विभाग में आवेदन लगाया तो पता चला कि वह पांच साल से नियमित कर्मचारी के रूप में काम कर रहा है साथ ही उसका वेतन भी हर माह निकल रहा है। इसके बाद आरटीआइ के माध्यम से जानकारी मिली कि दिव्यांगों के नाम पर 1000 करोड का घोटाला किया गया है। पूर्व चीफ सेक्रेटरी ढांड की अपील पर फिलहाल सीबीआइ जांच पर रोक लगी हुई है।








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